भारत की जनता इतना भोला भाला जैसे कि एक छोटे से बच्चे को माँ झुनझुना दे कर भुला देती है. भारत की स्वतंन्त्रता से लेकर आज तक जितने भी घटना या दुर्घटना सब को भारत की जनता भूल चुकी है. जब तक घाव दर्द देता है तब तक उसको याद रहता है की एक घाव है जब घाव भर जाता है उसके बाद सब कुछ भूल जाता है. क्यूंकि उसको कोई याद दिलाने वाला भी तो होना चाहिए. यदि भी कोई उसको याद दिलाता है फिर भी माँ की झुनझुना जैसे अगर कुछ उसको मिल जायेगा तो फिर से भूल जाएगा की कुछ हुआ था. एक बात ध्यान देना योग्य है कि, क्या भा. ज. पा का शासन ख़राब था ? भा. ज. पा देश को विकाश कि राह पर नहीं ले गया था ? तो फिर क्यूँ लोग भूल गए ? लोग सब कुछ भूल जायेंगे. कांग्रेस वाले कुशासन करने में माहीर है. देश कि जनता को कैसे बेवकूफ बनाया जाता है उनको अच्छी तरह मालूम है.
शनिवार, 25 जून 2011
बेशर्मी की भी कोई हद होती है
न्यूयॉर्क में समलैंगिक शादियों को मान्यता
अमेरिकी प्रांत न्यूयॉर्क में समलैंगिक शादी को मान्यता देने के लिए एक विधेयक को मंजूरी दे दी गई है. शुक्रवार को हुए मतदान में समलैंगिक शादियों के पक्ष में 33 वोट पड़े जबकि विरोध में 29. इस के साथ ही न्यूयॉर्क अमेरिका का छठा ऐसा राज्य बन गया है जहां ऐसी शादियां मान्य होंगी. इस विधेयक के कानून बनने के तीस दिन बाद से शादियां हो सकेंगी. हालांकि धार्मिक संस्थायों को इन शादियों का हिस्सा बनने के लिए नहीं कहा जाएगा.
बेशर्मी की भी कोई हद होती है
इतिहास के पन्नों को अगर पलट कर देखें तो 25 जून को ही भारत में इंदिरा सरकार ने आपातकाल लागू किया था
1975 : भारत में आपातकाल लागू
आपातकाल के बाद 1977 के आम चुनावों में कांग्रेस की बुरी तरह से हार हुई थी
वर्ष 1975 में इंदिरा गाँधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की सलाह पर भारत के राष्ट्रपति फ़खरुद्दीन अली अहमद ने देश में आपातकाल लगाने की घोषणा की थी.
आपातकाल लागू करने के साथ ही देश में लोगों के तमाम जनतांत्रिक और मूलभूत अधिकार निलंबित कर दिए गए थे. इसके अलावा अख़बारों और समाचार के सभी माध्यमों के ऊपर सेंसरशिप लागू कर दी गई थी.
देश के सभी विपक्षी दलों के नेताओं जैसे अटल बिहारी वाजपेयी, जयप्रकाश नारायण, जॉर्ज फर्नांडिस, जेबी कृपलानी, और चरण सिंह सहित कई लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया था.
सरकार ने देश में आपातकाल का कारण घोर आतंरिक अस्थिरता बताया था.
राजनीतिक विश्लेषक इस आपातकाल के पीछे इलाहबाद हाईकोर्ट के उस निर्णय देखते हैं जिसमें इंदिरा गांधी के रायबरेली से चुनाव को रद्द कर उन्हें छह साल के लिए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार दे दिया गया था.
ये आपातकाल जनवरी 1977 में जा कर समाप्त हुआ. प्रख्यात गांधीवादी विनोबा भावे ने इस आपातकाल का समर्थन किया था और इसे अनुशासन पर्व कहा था
शुक्रवार, 24 जून 2011
माननीय गोविन्दाचार्या जी सादर प्रणाम,
आप को ये मेरे द्वारा लिखा गया तिशरा प्रश्न है. आप जैसे ५ महान लोगों का वरद हस्त तथा मार्ग दर्शन स्वामी रामदेव जी को मिल रहा था फिर भी क्यूँ इतना बड़ा आन्दोलन को सरकार ने कुछ ही समय कुचल कर रख दिया ? और इस मुद्दे पर आप लोगों का अगले रणनीति क्या होगा ? क्ष्यमा करें, क्या स्वामी जी के अन्दर कुछ अहम भाव तो नहीं आगया था ? या योजना में कुछ कमी रह गया था ?
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